पुण्यतिथि विशेष : देश के पहले असली ऑलराउंडर थे दत्तू फडकर – Dattu Phadkar, First Real Allrounder Of Indian Cricket

नई दिल्ली। 1932 में पहली बार भारत के टेस्ट क्रिकेट संग्राम में उतरने के बाद गुरुवार को भारतीय क्रिकेट टीम रांची में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना 511वां टेस्ट मैच खेलने उतरी। इस दौरान 287 क्रिकेटरों ने देश के लिए टेस्ट कैप पहनने का श्रेय हासिल किया। लेकिन बात आती है, जब ऑलराउंड क्रिकेटरों की तो देश के खाते में सिर्फ 38 खिलाड़ी ऐसे आते हैं, जो 50 या उससे ज्यादा विकेट भी रनों का अंबार लगाने के साथ-साथ अपने खाते में शामिल कर पाए। इन ऑलराउंडरों की सूची में बल्ले और गेंद के बीच औसत के अंतर के हिसाब से दत्तू फडकर 7वें नंबर पर आते हैं। लेकिन 17 मार्च, 1985 को भारतीय क्रिकेटप्रेमियों का साथ छोड़कर दूसरी दुनिया के लिए रवाना हो गए 6 फुट लंबे इस क्रिकेटर की खूबी बस इतनी सी ही नहीं थी।

ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर किया था धमाकेदार आगाज
ऑस्ट्रेलियाई पिचों का नाम सुनते ही जहां दुनिया के बड़े से बड़े बल्लेबाज की आज भी ‘नानी’ कांपती है, यदि किसी बल्लेबाज को उन्हीं पिचों पर अपना अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू करना हो तो उसका क्या हाल होगा? दत्तू फडकर ने अपना टेस्ट करियर इन्हीं ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर तब शुरू किया था, जब देश की आजादी के जश्न के खुमार में डूबा हुआ था। भारतीय टीम पहली बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रही थी। ऐसे में इस टीम के पास न तो वहां के विकेटों का मिजाज बताने वाला अपने किसी पुराने क्रिकेटर की सलाह मौजूद थी और न ही वहां के क्रिकेटरों के बारे में बहुत ज्यादा जानते थे।

ऐसी परिस्थितियों के बीच 12 दिसंबर 1947 को सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर अपने टेस्ट करियर का पहला रन उस ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी के सामने बनाया था, जिसकी अगुआई रे लिंडवाल और कीथ मिलर जैसे खौफनाक तेज गेंदबाजों की जोड़ी कर रही थी। बता दें कि लिंडवाल और मिलर को टेस्ट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में गिना जाता है। यह सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच था। दत्तू फडकर ने अपने करियर की शुरुआत 51 रन की शानदार अद्र्धशतकीय पारी से की और मैच में 14 रन देकर 3 विकेट भी चटकाए।

विशेषज्ञों ने लिखा था कि फडकर उधेड़ते हैं गेंदबाज की बखिया
उस सीरीज की मैच रिपोर्ट पढ़ी जाएं तो तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट विशेषज्ञों ने इस लंबे-चौड़े ऑलराउंडर की जमकर तारीफ की और लिखा गया कि फडकर न केवल जमकर बल्लेबाजी करते हैं बल्कि लिंडवाल और मिलर जैसे गेंदबाजों की बखिया उधेडऩे वाले शॉट खेलने से भी परहेज नहीं करते। गेंद को सीम और स्विंग कराने में माहिर फडकर अपनी दाएं हाथ की बल्लेबाजी से विकेट के चारों तरफ शॉट खेलते थे और आजकल के वनडे मैचों की तरह उस समय के टेस्ट मैचों में भी उनका गेंद को क्षेत्ररक्षक के सिर के ऊपर से उठाकर बड़ा शॉट खेलने के लिए मारना दर्शकों को ‘टुकटुक मार्का’ बल्लेबाजी के दौर में अलग ही अनुभूति देता था।

शीर्ष-3 बल्लेबाजों में थे पहली ही सीरीज में
फडकर ने अपनी पहली सीरीज में 4 टेस्ट मैचों में 314 रन बनाने में जहां 3 शानदार अद्र्धशतक और अपना पहला शतक लगाया, वहीं 8 विकेट चटकाकर अपनी मध्यम तेज गति गेंदबाजी से भी टीम को भरपूर सहयोग दिया। नतीजा 5 टेस्ट मैच की सीरीज में भारत ने 4 टेस्ट हारे, लेकिन 1 टेस्ट ड्रॉ कराने में वह सफल रहा, जो विशेषज्ञों ने भी एक गैरअनुभवी टीम की बड़ी सफलता माना। दत्तू फडकर इस दौरे पर भारतीय टीम की तरफ से टेस्ट मैचों में तीसरे सबसे सफल बल्लेबाज साबित हुए।

भारत की पहली टेस्ट जीत में भी दिया अहम योगदान
दत्तू फडकर के करियर में यदि भारतीय टीम की पहली टेस्ट जीत का जिक्र नहीं किया जाए तो यह शायद उस बेहतरीन ऑलराउंडर के साथ नाइंसाफी होगी। 1952 में मद्रास (अब चेन्नई) में इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के 5वें टेस्ट को पंकज रॉय और पाली उमरीगर के शतकों तथा वीनू मांकड के 12 विकेटों के लिए ही याद किया जाता है। लेकिन टेस्ट के पहले ही ओवर में इंग्लिश ओपनर फ्रेंक लॉसन को पवेलियन लौटाकर जो झटका दिया, वो शायद इंग्लिश मनोबल को तोडऩे वाला साबित हुआ।

भारत की पहली पारी में उनकी 61 रन की बेहतरीन पारी ने ही पाली उमरीगर को अपने शतक के लिए बड़ी साझेदारी के जरिए आधार बनाने में मदद दी। फडकर के इन 61 रन की तारीफ उमरीगर ने भी बाद में कई बार अपने इंटरव्यू में की। आपको बता दें कि इस टेस्ट मैच में इंग्लैंड की गेंदबाजी की कमान फ्रेंक टायसन (जिन्हें उनकी तेजी के लिए टायफून भी कहा जाता था) और ब्रायन स्टेथम जैसे आला दर्जे के गेंदबाज संभाल रहे थे। टेस्ट मैच की दूसरी पारी में भी फडकर ने 191 रन से पिछड़ी इंग्लैंड का मनोबल एक बार फिर लॉसन को सिर्फ 7 रन पर आउट करते हुए स्कोर 2 विकेट पर 15 रन करते हुए तोड़ दिया था।

कोलकाता में खेली थी टेस्ट बचाने वाली पारी
कोलकाता के इडेन गार्डंस स्टेडियम को भले ही आजकल के क्रिकेटप्रेमी सबसे ज्यादा वीवीएस लक्ष्मण-राहुल द्रविड़ की साझेदारी और हरभजन सिंह की हैट्रिक के लिए याद रखते हों, लेकिन यह मैदान फडकर के भी सबसे बेहतरीन ऑलराउंड प्रदर्शन का साक्षी रहा है। यह प्रदर्शन भी 1951-52 की उसी सीरीज में आया था, जिसमें बाद में भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच जीता था। कोलकाता में हुए सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच में फडकर ने इंग्लैंड के 342 रन के सामने सिर्फ 144 रन पर पंकज रॉय, वीनू मांकड, लाला अमरनाथ, पाली उमरीगर, विजय हजारे जैसे बड़े बल्लेबाजों के विकेट खोकर संकट में फंसी भारतीय टीम को 115 रन की पारी खेलते हुए 344 रन के स्कोर पर पहुंचाया और 2 रन की मनोवैज्ञानिक बढ़त भी दिलाई। इस टेस्ट में फडकर ने इंग्लैंड के 4 अहम विकेट भी चटकाए थे। नतीजतन भारत यह टेस्ट ड्रॉ कराने में सफल रहा था।

2012 में याद किया बीसीसीआई ने
31 टेस्ट में 32.34 के औसत से 1229 रन बनाने वाले और 36.85 के औसत से 62 विकेट चटकाने वाले दत्तू फडकर के भारतीय क्रिकेट में योगदान को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भी 2012 में सराहा था, जब उन्हें भी 7 अन्य महान क्रिकेटरों के साथ ‘भारतीय क्रिकेट में सबसे अहम योगदान’ के लिए विशेष बीसीसीआई अवॉर्ड मरणोपरांत दिया गया था। फडकर का साहस आज भी ऑस्ट्रेलिया में पहली बार खेल रहे किसी भी भारतीय क्रिकेटर के लिए प्रेरणा साबित हो सकता है।

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